जंगल बचाने वन विभाग ने इमारती पेड़ो पर लगाया फेंसिंग
लाखों के बम्बू गायब, उत्तर वन मंडल सामान्य का मामला

बालाघाट|
सरकार द्वारा पेड़ पौधे एवं वन की सुरक्षा के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य जंगल को कटने से बचाना तथा जानवरों से पौधों की सुरक्षा करना है जिसके लिए वन विभाग के पास लाखों का बजट आया था जिससे बांस के बम्बू में बार्बेड वायर खरीदकर फेंसिंग लगाया जाना था परंतु बालाघाट जिले में अनोखी पहल के साथ उत्तर सामान्य वन मंडल बालाघाट काम कर रहा है इमारती पेड़ पर फेंसिंग लगाने मजबूर है उप वनमण्डलाधिकारी प्रशांत साकरे से जानकारी लेने पर उनके द्वारा बताया गया कि एक नग बांस का बम्बू लगभग 125 रुपए का है और डिविजन में फेंसिंग लगाने बांस के बम्बू के लिए अनुमानित 15 लाख रुपए आए थे जिस राशि से विभाग द्वारा बम्बू लगाकर फेंसिंग किया गया है आपको बता दे कि एक ओर वन विभाग दावे कर रहा है कि वनों को कटने से बचने के लिए हमारे द्वारा फेंसिंग लगाई गई है वहीं दूसरी ओर फेंसिंग इमरती पेड़ सागौन पर लगाई गई है आखिर ठेकेदार द्वारा लगाई गई बांस बम्बू गया कहा जबकि उत्तर सामान्य लामता के उत्तर और दक्षिण लामता में अनेकों जगह पर फेंसिंग इमारती पेड़ पर लगाई गई है सरकार की राशि और योजनाओं का बंटाधार करने में उत्तर सामान्य वन मंडल सामान्य बालाघाट एक कदम आगे चल रहा है फेंसिंग इमारती पेड़ पर ही लगाना था तो लाखों रुपए का क्यों किया गया बंदरबाट जिम्मेदार ठेकेदार से मिलकर खा रहे मलाई वनों की सुरक्षा में नहीं दिख रही सजगता ।
नहीं दिख रहे लाखों रुपए से लगे बम्बू, इमारती सागौन में मारे किले
उत्तर एवं दक्षिण लामता सामान्य में कई बीटों में बार्बेड वायर जमीन की धूल खाने मजबूर है मानो विभाग के जिम्मेदार उन्हें उठा ही नहीं पा रहे हो लाखों की लगत से ठेकेदार द्वारा लगाए गए बम्बू जैसे गायब ही हो गए हो मजबूरन कुछ जगह जिम्मेदारों ने जंगल से खुटा काटकर फेंसिंग लटका दिया है आखिर 15 लाख के बम्बू कहा गायब हो गए है अब इसी मामले में विभाग के जिम्मेदारों से पूछा जाएगा तो शायद उनके द्वारा सफाई देते हुए कहा जा सकता है कि हमने तो बम्बू लगाया था पर वहा टूट गए या जल गए होंगे आखिर इस सफाई से क्या जंगल बच पाएगा या शासन प्रशासन को चुना लगाने का कार्य वन विभाग द्वारा निरंतर जारी रहेगा सवाल तो बनता है कि आखिर 15 लाख के बम्बू 5 साल भी सही ढंग से नहीं चल पाए ठेकेदार और जिम्मेदार तो मौज काट रहे है पर वन संपदा लाखों की फेंसिंग के बाद भी बर्बाद होने की कगार पर है इमारती सागौन बार्बेड वायर के साथ लगी कील के दर्द से कराह रहे है और जिम्मेदार उन्हें बचाने के दावे कर रहे है आखिर ये कैसी वन की सुरक्षा की जा रही है देखना होगा कि समाचार प्रकाशन के बाद क्या हरकत में आता है वन विभाग।
किले चुभाकर बता रहे,हो रही वनों की सुरक्षा
उत्तर वन मंडल सामान्य बालाघाट में पूर्व में भी अनेकों आरोप लगे है जिसपर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है सूत्रों का मानना है कि एसडीओ प्रशांत साकरे और ठेकेदार से अच्छे सम्बन्ध होने के कारण अनियमितता किया गया है जबकि वन विभाग के जिम्मेदार होने का फर्ज निभाने में साकरे कोताही कर रहे है चाहे बार्बेड वायर की बात हो या बम्बू की दोनों ही मामले में साकरे की भूमिका संदिग्ध है 15 लाख की लागत से लगाए गए बम्बू बहुत सी जगह से गायब होते दिख रहे है और मजबूरन वन अमले को इमारती सागौन पर किले चुभाकर बार्बेड वायर की फेंसिंग करना पड़ रहा है जिसके इमारती पेड़ भी रोने मजबूर है पर वन विभाग सुरक्षा के खोखले दावे करने मजबूर है अगर पेड़ की सुरक्षा करने के लिए 15 लाख रुपए आए तो कहा लगाया गया है इस मामले की जांच किया जाना चाहिए ताकि वन विभाग की सुरक्षा में लाफरवाही न किया जा सके।
“एक बांस बम्बू लगभग 150 रुपए का है जहां बांस टूट गए है वहां पर स्थानीय व्यवस्था बनाकर फेंसिंग खड़ी की गई है फेंसिंग मजबूत रहे इसलिए पेड़ो का सहारा लेकर अन्य पेड़ पर फेंसिंग लगाई गई है अनुमानित 15 लाख रुपए आया था जिसके तहत कार्य किया गया है इमारती पेड़ पर फेंसिंग नहीं लगाई गई है आपको कही दिखे तो बताइए जांच की जाएगी ।”
प्रशांत साकरे
उप वनमण्डलाधिकारी
उत्तर सामान्य बालाघाट



