
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन कानूनों की प्रभावी समझ और व्यावहारिक प्रशिक्षण पुलिस बल, अभियोजन अधिकारी एवं अन्य संबंधित कर्मियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से कार्यशालाओं और सेमिनारों का आयोजन किया जाए, जिनमें केस स्टडी और मॉक ट्रायल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अपराध अनुसंधान प्रणाली को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और प्रमाणिक बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आपराधिक प्रकरणों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि सटीक और पुख्ता साक्ष्य के आधार पर विवेचना पूरी की जाए ताकि अभियुक्तों को सजा दिलाई जा सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विवेचना अधिकारियों को आधुनिक अनुसंधान तकनीकों, डिजिटल फॉरेंसिक, सीसीटीएनएस प्रणाली और वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग में दक्ष किया जाए। पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए अनुसंधान प्रक्रिया में पारदर्शिता, तत्परता और तकनीकी दक्षता अनिवार्य है। मुख्यमंत्री साय ने साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए साइबर सेल को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने तथा जनता को साइबर जागरूकता से जोड़ने के लिए अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह,सचिव राहुल भगत के अलावा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।




