मध्यप्रदेशराज्य

चार आदिवासी बालिकाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले को लेकर

संयुक्त आदिवासी मोर्चा के बैनर तले सकल आदिवासी समाज ने निकाली जन-आक्रोश रैली सौपा ज्ञापन

 

बालाघाट,  जिले के हट्टा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम दुगलई में चार आदिवासी बालिकाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में न्याय की मांग को लेकर 07 मई को आदिवासी समाज ने संयुक्त आदिवासी मोर्चा के बैनर तले जन-आक्रोश रैली निकाली। रैली आंबेडकर चौक से हनुमान चौक मेन रोड और काली पुतली चौक होते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची। इस दौरान सकल आदिवासी समुदाय ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की और पुलिस अधीक्षक को हटाने की मांग की।

 सरकार असंवेदनशील

जन-आक्रोश रैली के संदर्भ में जानकारी देते हुए आदिवासी नेताओ ने बताया कि 23 अप्रैल की रात डेढ़ से दो बजे के बीच चार आदिवासी बच्चियों के साथ सात आरोपियों ने गैगरेप की वारदात को अंजाम दिया। जो एक विवाह समारोह से घर की ओर लौट रही थीं। घटना को सात आरोपियों ने अंजाम दिया था। लेकिन मामले में अभी तक कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़ितों को न्याय नहीं दिया गया है। इस पर आदिवासी संयुक्त मोर्चा के द्वारा जन-आक्रोश रैली निकाली। दूसरी ओर घटना पर मप्र सरकार ने भी बेटियों के प्रति कोई संवेदना व्यक्त नही की है। यह दुर्भाग्य पूर्ण है।

एक करोड़ दिया जाए

जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी विधायक संजय उईके ने कहा कि हमारी मांग है कि पीड़ित परिवार को 01 करोड रूपये की आर्थिक सहायता दी जाये तथा पीड़ित परिवारों को सुरक्षा मुहैया कराई जायें। इसके साथ ही इस मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये। सरकार प्रशासन पर किसी भी प्रकार से कोई दबाव ना दे ताकि पुलिस पूरी निष्पक्षता के साथ कार्य कर सके ।

 आदिवासी समाज असंतुष्ट

प्रदर्शन व रैली के माध्यम से सकल आदिवासी समाज ने यहां कलेक्ट्रेट कार्यालय को घेरा और अपर कलेक्टर को 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। जहां समाज ने पीड़ित परिवारों को 01 करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता देने व परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने तथा प्रकरण को फास्टट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की।

सभी सात आरोपियों लोकेश मात्रे, लालचंद खरे, अजेन्द्र बाहे, अज्जु बगडते, राजेन्द्र कावरे, मानिराम बाहे और इंग्लेश मात्रे को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन पुलिस की इस कार्यवाही से आदिवासी समाज संतुष्ठ नही है।

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