अपने किये कृत्य के लिये माफी मांगे विधायक, किसान आंदोलन का बनाया मजाक
मेरा नहीं, आंदोलनकारियों का विधायक ने किया अपमान : शंकर बिसेन

बालाघाट,
जनपद पंचायत बालाघाट के उपाध्यक्ष शंकरलाल बिसेन ने दो दिन पहले समनापुर में हुये सिंचाई के लिये पानी दिये जाने को लेकर किसान आंदोलन में विधायक मधु भगत द्वारा किये गये कृत्य की आलोचना करते हुये कहा कि विधायक ने मुझे घूसा मारने सहित कई अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। जो विधायक जैसे पद को शोभा नहीं देता हैं। इस कृत्य को छुपाने के लिये विधायक द्वारा यह कहा जाना कि मैने मजाक में किया। ऐसा कहा जाना भी मेरा नहीं किसानों व किसान आंदोलन का अपमान हैं। किसी के साथ मजाक में भी इस तरह के अव्यवहार कोई नहीं कर सकता हैं पर वहां तो सार्वजनिक तौर पर विधायक मधु भगत ने हाईपर होते हुये अभद्रता की हैं। आंदोलनकारी मेरे पक्ष में नहीं आते तो संभव हैं कि विधायक मुझसे मारपीट भी कर सकते थे।
इस संबंध में पत्रकारवार्ता लेकर जनपद उपाध्यक्ष शंकर लाल बिसेन ने कहा कि विधायक को अपने इस कृत्य के लिये आंदोलनकारी किसानों से माफी मांगना चाहिए और मेरी मांग भी यही हैं कि विधायक अपने किये कृत्य के लिये पश्चाताप कर माफी मांगे। आगे इस मामले में हम शिकायत भी करेगें। चूंकि जनता सबकुछ देख रही और जान रही हैं कि विधायक बनने के पश्चात वे किस तरह से आचरण कर रहे हैं। निश्चित ही ऐसे निचले आचरण करने वाले को जनता आगामी चुनाव में अवश्य बदला लेकर सबक सिखायेगी।
शंकर लाल बिसेन ने घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुये कहा कि पूर्व से नियोजित कार्यक्रम के तहत 16 अप्रेल दिन बुधवार को ग्राम समनापुर के बाजार चौक में किसानो के पक्ष में मै जनपद उपाध्यक्ष शंकर लाल बिसेन के अलावा जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा लिल्हारे सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण कृषक बैठे हुये थे। आंदोलन सुबह 10 बजे से प्रारंभ हो गया था। विधायक दोपहर में 1 बजे आये थे। विधायक को इस आंदोलन में आने की मंशा नहीं थी। अगर उन्हें आना रहता तो वे चरेगांव से जो कि आंदोलन स्थल से महज 12 से 13 किमी दूर हैं वहां से आने में उन्हें 3 घंटा नहीं लगता बल्कि 10 से साढ़े 10 बजे पहुंच जाते। लेकिन उन्हें आंदोलन को मजाक बनाना था और स्वंय ने बयान देकर बता भी दिया कि मैने मजाक में घूसा मारने सहित अश्लील भाषा का प्रयोग कर दिया।
शंकर लाल बिसेन ने कहा कि आंदोलन के निकट पहुंचने पर विधायक जब आये तो मैंने कहा कि अभी हमारा आंदोलन किसानों की फसल बचाने के लिये चल रहा हैं। ऐसे में विधायक भी इसमें शामिल होवे और उनके वाहन भी आगे नहीं जायेगा। इतना कहते ही विधायक इतना जयादा आक्रामक हो गये कि उन्होने मेरे साथ अभद्रता कर दी। मेरे साथ नहीं यह आंदोलन के साथ अभद्रता थी। विधायक ने इस कृत्य को लेकर जो बयान दिया उसमें कह रहे हैं कि मजाकिया अंदाज था, वह स्थान कोई नौटंकी या हास्यप्रद कार्यक्रम दिखाने वाला स्थान या स्थिति नहीं थी। वह स्थान क्षेत्रिय किसानो द्वारा अपनी फसल की सिंचाई के लिये पानी की गई मांगो को लेकर कर रहे धरना प्रदर्शन स्थल था जहाँ विधायक द्वारा मजाकिया अंदाज दिखाना या करने का सवाल उत्पन्न ही नही होता है। मैं मीडिया साथियो के माध्यम से जनता को बताना चाहता हूँ कि क्या क्षेत्रिय किसानो का धरना प्रदर्शन, किसान भाईयो के खेत में लगी मुरझाती फसल, भरी दुपहरिया में सुबह 10 बजे से चिलचिलाती धूप में धरना प्रदर्शन करता किसान, क्या विधायक को मजाकिया कार्यक्रम समझ आता है। क्या ढाई लाख क्षेत्रिय जनता ने आपको एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित कर भिजवाया है क्या मजाकिया अंदाज करने के लिये, विधायक द्वारा ऐसा गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य कहना एक संवैधानिक पद पर बैठे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को शोभा नही दिया जाता है। विधायक द्वारा बोला गया कि एक घूंसा मारूंगा और अब्बे जैसे अपशब्दो का किसान साथियो के धरना स्थल पर कहा जाना मजाकिया अंदाज नही है। विधायक द्वारा उक्त घटना को मजाकिया अंदाज कहना अशोभनीय है। विधायक उक्त घटनाक्रम के संबंध में पश्चाताप करें और किसान साथियो से सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करें।



