सीतापार किरनापुर में रागी बीज का किया गया वितरण

बालाघाट| म प्र के बालाघाट जिले में धान की खेती पारंपरिक रूप से रोपा पद्धति से की जाती है। बालाघाट जिले में धान की खेती के अनुरूप मिट्टी और जलवायु है। बालाघाट जिले की मिट्टी और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर यहां धान की फसल होती है।
रागी फसल
लेकिन कृषि विभाग द्वारा नवाचार के रूप में जिले में रागी फसल को भी सामने लाया जा रहा है, जो कि किसानो के लिए एक वरदान साबित होगा। यह फसल वर्ष में दो बार लगायी जाती है । रागी की फसल खरीफ एवं रबी दोनो सीजन के लिए उपयुक्त होती है। इसका 10 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से लगाया जाता है। रागी की फसल कम पानी में पैदा हो जाती है एवं दोमट, रेतिली मिट्टी इसके लिए उपयुक्त होती है । इसका उत्पादन 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ हो जाता है। इस फसल को कम पानी के साथ कम दवाई एवं कम रासायनिक खाद में भी तैयार किया जा सकता है। इसका बाजार मूल्य लगभग 5000 रुपए प्रति क्विंटल होता है। इसके बोनी करने के लिए रोपा एवं बोवार पद्धति दोनो प्रचलित है । वनांचल ग्रामों में किसानो से चर्चा के दौरान यह बात सामने आई की रागी की फ़सल को आज से 15 से 20 वर्ष पहले ग्रामीण एवं वनांचल ग्रामों में पारंपरिक रूप से उगाया जाता था इसका चावल और पेज बनाकर ग्रामीण सेवन करते थे । रागी कई तरह की बीमारी बीपी, शुगर, ब्लड प्रेशर के लिए लाभदायक होता है।
ग्राम सीतापार के किसानो को किया गया रागी बीज वितरण
उप संचालक कृषि बालाघाट के निर्देशानुसार कृषि विस्तार अधिकारी संजय ऊके द्वारा 01 जुलाई को ब्लॉक किरनापुर अंतर्गत ग्राम सीतापार, बोरबन, डोंगरगांव एवं ग्राम पंचायत सुसवा के कृषकों को रागी बीज का वितरण किया गया। इस क्षेत्र में 10 से 12 हेक्टेयर में रागी फसल का क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है। किसानो को कोदो कुटकी की फसल लगाने की सलाह दी गई।इस दौरान कृषक रत्नेश शिवहरे, ताराचंद वैद्य ,राजेश पांचे सुसवा द्वारा विस्तृत रूप से बताया गया कि उनके द्वारा रागी की फ़सल का विस्तार किया जा रहा है।




