
दल्लीराजहरा। नगर पालिका दल्लीराजहरा में 15 वें वित्त के टाइड ग्रांट ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अंतर्गत वाहन/ उपस्कर क्रय किए जाने निम्न सामानों बेलिंग मशीन, पानी टैंकर, ई-कार्ट फार गार्बेज, मोबाइल टायलेट, इंसीनेटर यूनिट, नाला मेन, सक्शन मशीन ट्वीन बिन(स्टील), ट्राइसाइकिल, टोइंग ट्रेलर मशीन जेम पोर्टल से खरीदी हेतु 2 करोड़ 47 लाख की निविदा जारी की गई थी, जिसमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी, लेखपाल एवं सहा. अभियंता द्वारा ठेकेदार को लाभ पहचाने हेतु भारी अनियमितता बरतते हुए ठेकेदार को भुगतान किया गया है। जिसकी निम्न बिंदुओं पर जांच करवाना चाहते है। नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा के उपाध्यक्ष मनोज दुबे ने बताया कि सहायक. अभियंता द्वारा अपने चहते ठेकेदार को लाभ पहचाने हेतु मुख्य नगर पालिका अधिकारी से साठ गांठ कर खुद को जेम पोर्टल का बायर बनाया गया और ठेकेदार के दिए नियम शर्तों को बिना सक्षम स्वीकृति लिए अलग अलग सामानों हेतु एक समान नियम शर्तों की झड़ी लगाकर ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा बिना सामान आए ही लेखपाल के साथ मिलकर ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। जिसके बाद समान नगर पालिका में पहुंचा है। जिसकी पुष्टि भंडार शाखा के पंजी से की जा सकती है। भुगतान की तारीख ओर स्टॉक पंजी की तारीख से मिलान किया जा सकता है। नगर पालिका में वरिष्ठ अभियंता के रहते आए हुए सामानों की गुणवत्ता परीक्षण भी सहा. अभियंता द्वारा ही किया गया, जो कि इसके बायर भी है, वो इसलिए क्योंकि इनके द्वारा बिना सामान आए ही भुगतान किया जा चुका था। इस हेतु गुणवत्ता परीक्षण भी स्वयं ही इनके द्वारा किया गया। मनोज दुबे ने आगे बताया कि इन सब प्रक्रिया में इन अधिकारियों ने इतनी जल्द बाजी की गई कि बिल को न विधिवत रूप से किसी लिपिक के द्वारा बढ़ाया गया न ही बिल को भंडार शाखा से बढ़ाया गया है। इन भ्रष्ट अधिकारियों को ठेकेदार को बिना सामान आए भुगतान करने की इतनी जल्दी थी कि बिना पीआईसी/ परिषद से सक्षम स्वीकृति लिए बिना ही अग्रिम भुगतान कर दिया गया। जिस दिन नगर पालिका में समान आया उसी दिन स्वच्छता दीदियों द्वारा समान खराब होने की शिकायत सामूहिक रूप से नगर पालिका अध्यक्ष को की गई थी। तब सीएमओ ने दूसरा सामान मंगवाना का वादा कर इन्हीं कर्मचारियों पर दबाव बनवाकर उनसे ही इसको काम में लाने के लिए कहकर इसका उपयोग करवाया गया। मार्केट में जो टैंकर 16 लाख 5 हजार में मिलता है उसे नगर पालिका अधिकारी द्वारा 45 लाख में और ई रिक्शा जो 1 लाख 28100 में मार्केट में मिलता है उसे 4 लाख 33 हजार में खरीद कर शासन को लाखों की चपत लगाई गई है। शासन के भंडार नियम का वो केंद्र शासन के 15 वें वित्त के तहत आदेश का पालन नहीं किया गया। नगर पालिका उपाध्यक्ष मनोज दुबे ने बताया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी भूपेंद्र वारडेकर पूर्व में कोंडागांव नगर पालिका में आर्थिक अनियमितता बरतने पर शासन द्वारा इनको सस्पेंड किया गया है इनके द्वारा हाईकोर्ट से स्टे लेकर फिर से आर्थिक अनियमितता बरतते हुए शासन को लाखों की चपत लगाई गई है। अत: आपसे निवेदन है कि 15 वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट मद से हुए सामग्री सप्लाई कार्य में हुए भ्रष्टाचार की जांच कर दोषी अधिकारियों से वसूली की कार्यवाही की जाए।




