
पंडरिया। नगर में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट टूर्नामेंट का खुमार सिर चढ़कर बोल रहा है, और इसके साथ ही सटटेबाजी का अवैध कारोबार भी चरम पर पहुंच गया है। नगर के प्रत्येक चौक-चौराहे से लेकर गली-मोहल्लों तक सटटेबाजी का जाल फैल चुका है। चिंता की बात यह है कि इसमें हर आयु और वर्ग के लोग शामिल होते जा रहे हैं। युवक तो पहले से सक्रिय थे, अब महिलाएं भी इस अवैध गतिविधि का हिस्सा बनती दिखाई दे रही हैं।
गेंद, विकेट और ओवर पर लगाए जा रहे दांव
जैसे ही आईपीएल का कोई मैच शुरू होता है, खाईवाल सक्रिय हो जाते हैं। हर गेंद, हर ओवर और प्रत्येक विकेट पर सट्टे के दांव लगाए जा रहे हैं। कौन सा बल्लेबाज कितने रन बनाएगा, कितने ओवर में कितने रन आएंगे, या कौन गेंदबाज कितनी विकेट लेगा, इन सब बातों पर हजारों से लाखों रुपये तक का दांव खेला जा रहा है। मोबाइल फोन और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए यह नेटवर्क तेजी से संचालित हो रहा है, जिससे पकडऩा भी चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।
महिलाएं भी हो रही शामिल
चौंकाने वाली बात यह है कि अब सटटेबाजी की गिरफ्त में महिलाएं भी आती जा रही हैं। आर्थिक लाभ की लालच में महिलाएं न केवल दांव लगा रही हैं, बल्कि कुछ स्थानों पर सटटेबाजी संचालन में भी भूमिका निभा रही हैं। इससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है और परिवारों में कलह की स्थिति बनने लगी है।
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
नगर में सटटा गतिविधियां खुलेआम हो रही हैं, इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई अब तक देखने को नहीं मिली है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस प्रशासन जानकार होने के बावजूद अनदेखी कर रहा है, जिससे सटटेबाजों के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं।
समाज पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव
सटटेबाजी के इस फैलते जाल का सबसे बुरा असर युवाओं पर पड़ रहा है। पढ़ाई-लिखाई छोड़ युवा वर्ग सटटेबाजी में उलझता जा रहा है। कर्ज में डूबने, आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं के मामले भी सामने आने लगे हैं। कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, तो कई युवाओं के भविष्य अंधकारमय होते जा रहे हैं।
नगरवासियों ने उठाई मांग
स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नगर में सटटेबाजी पर तत्काल प्रभावी रोक लगाई जाए। गुप्त निगरानी के माध्यम से सटटेबाजों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को इस गर्त में जाने से रोका जा सके।




