छत्तीसगढ़राज्य

पुलिया बिना नाले के: कबीरधाम में सड़क निर्माण में गुणवत्ता पर उठे सवाल

कवर्धा। प्रधानमंत्री जनजाति न्याय महाभियान और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कबीरधाम जिले में हो रहे सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर पलानीपाट से कोहापाली तक बनाई जा रही इस सड़क में नाले की अनुपस्थिति के बावजूद दो पाइप पुलिया का निर्माण किया गया है, जिससे निर्माण की आवश्यकता और पारदर्शिता को लेकर शंका गहराने लगी है।

जनजातीय समुदाय के लिए संपर्क मार्ग, लेकिन गुणवत्ता संदिग्ध

कौहापानी क्षेत्र के जनजातीय ग्रामीणों को मुख्य मार्ग से जोडऩे के उददेश्य से इस सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई 1.150 किमी है और अनुमानित लागत ?59.24 लाख रखी गई है। निर्माण कार्य का जिम्मा मेसर्स अमित कंस्ट्रक्शन, कवर्धा को सौंपा गया है, जबकि परियोजना क्रियान्वयन इकाई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, कवर्धा के तहत इसका क्रियान्वयन हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री, विशेषकर मुरूम, का प्रयोग किया गया है। इसके चलते सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिया निर्माण की वैधता पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल इस परियोजना के तहत बनी दो पाइप पुलियाओं को लेकर है। क्षेत्र में किसी प्रकार का स्पष्ट जलप्रवाह (नाला) मौजूद नहीं है, इसके बावजूद पुलिया निर्माण को तर्कसंगत ठहराया गया है। ठेकेदार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पुलिया पहाड़ों से बहकर आने वाले पानी से सड़क को बचाने के लिए बनाई गई है। हालांकि स्थानीय किसान इस बात से चिंतित हैं कि इस पुलिया से आने वाला पानी सीधे उनके खेतों में जाएगा, जिससे फसलें बर्बाद होने की आशंका है।

सूचना पटल अधूरा, पारदर्शिता पर सवाल

निर्माणस्थल पर लगाए गए नागरिक सूचना पटल में परियोजना की मूलभूत जानकारी जैसे कि कितने पुल, पुलिया, डामरीकरण या सीसी रोड का निर्माण किया जाना है, स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाया गया है। यह पारदर्शिता की कमी और नियमानुसार सूचना प्रदर्शित न किए जाने की ओर इशारा करता है।

नियामक तंत्र की निगरानी ज़रूरी

इस प्रकार के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर निगरानी एजेंसियों की भूमिका अहम हो जाती है। जरूरत है कि इस निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में ज़रूरतमंद समुदायों तक पहुंचे, न कि ठेकेदारों और अधिकारियों के गठजोड़ की भेंट चढ़ जाए।

Related Articles

Back to top button