मध्यप्रदेशराज्य

प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर उठे विरोध के स्वर, आक्रोशित पत्रकारों ने सौंपा ज्ञापन

बालाघाट,

प्रदेश में लगातार पत्रकारों पर हो रहे जानलेवा हमलों,फर्जी मामलों में फंसाने और उनके परिवारों को प्रताड़ित किए जाने के मामलों से नाराज़ पत्रकारों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए बुधवार को थाना लालबर्रा और तहसील कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री व डीजीपी के नाम ज्ञापन सौंपा।पत्रकारों ने सरकार से प्रदेश में एक ठोस एवं प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग की,जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता को सुरक्षा मिल सके।

 पत्रकार पर हमले से उपजा आक्रोश

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 7 अप्रैल को पत्रकार मिलिंद ठाकरे पर दो नकाबपोश हमलावरों ने तेजधार हथियारों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। यह हमला दिनदहाड़े मुख्य सड़क पर हुआ, जिससे पत्रकार जगत में भय का माहौल व्याप्त है।पत्रकारों ने इस घटना के आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी एवं कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पुरानी घटनाओं का भी किया गया हवाला

पत्रकारों ने ज्ञापन में पूर्व की कई घटनाओं का भी जिक्र किया,जिनमें बालाघाट जिले कि कटंगी के पत्रकार संदीप कोठारी की जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई और 1 अक्टूबर 2019 को लालबर्रा में पत्रकार प्रकाश चौहान को बंधक बनाकर मारपीट व झूठे प्रकरण में फंसाया जाना शामिल है। इन घटनाओं को पत्रकारों ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला करार दिया।

एकजुट होकर उठाई सुरक्षा की मांग

ज्ञापन सौंपने पहुंचे पत्रकारों ने कहा कि प्रदेश में स्वतंत्र पत्रकारिता करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। कहीं पत्रकारों को जान से मारा जा रहा है,तो कहीं उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर डराने की कोशिश की जा रही है। ऐसी स्थिति में यदि पत्रकारों को विधिक संरक्षण नहीं मिला तो जनहित की पत्रकारिता खतरे में पड़ जाएगी।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे पत्रकारों में शामिल थे

मुकेश रंगारे,मुकेश अवधिया, मतीन खान,वरिष्ठ पत्रकार साथी विजय रजक जी,राहुल जायसवाल,आशीष भगत,मतीन रजा,देवेंश बिसेन,विश्वास मेश्राम, इमरान कुरैशी,राजेश ब्रम्हे सहित अन्य पत्रकार साथी मौजूद रहे। ज्ञापन की एक प्रति डाक द्वारा पुलिस महानिदेशक कार्यालय भोपाल (PHQ) को भी भेजी गई है।

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