
अंबिकापुर। सहकारी समिति में धान विक्रय किए बिना समिति प्रबंधक से मिली भगत कर लाखों रूपए की शासकीय राशि हड़पने के 20 साल पुराने मामले में जिला सत्र न्यायालय रामानुजगंज ने 12 लोगों को 3-3 साल की कारावास एवं 500-500 रूपए आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने मामले में पूर्व में आरोपियों को सजा सुनाई थी। आरोपियों ने प्रकरण के तथ्यों पर विचार नहीं करने की बात पर अपील की थी। वर्ष 2003-04 में सहकारी समिति रामानुजगंज एंव कामेश्वर नगर में धान बेचने वाले किसानों को धान विक्रय राशि का भुगतान नहीं मिलने की शिकायत हुई थी। मामले में कलेक्टर ने सहायक खाद्य निरीक्षक आरएस पैकरा के नेतृत्व में दल गठित कर जांच कराई थी। जांच में सहकारी समिति कामेश्वर नगर एवं रामानुजगंज द्वारा खरीदे गए एवं विपणन संघ का आपूर्ति किए गए धान की मात्रा में भारी अंतर पाया गया था। जांच के दौरान कामेश्वर नगर समिति की पंजी में 1616.40 क्विंटल मोटा एवं 8498.40 क्विंटल कुल पतला कुल 8417.80 क्विंटल धान दर्ज पाया गया था जिसकी कीमत 48230.092 रूपए है। समिति द्वारा विपणन संघ को 8332.80 क्विंटल धान की आपूर्ति की गई जिसका भुगतान समिति को 4764180 रूपए प्रदान किया गया। समिति द्वारा कृषकों को 52055284 रूपए का भुगतान किया गया। रामानुजगंज समिति में धान खरीदी संबंधी कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हुआ विपणन संघ द्वारा समिति से 6105.90 क्विंटल धान के एवज में 3499674 रूपए का भुगतान किया गया जबकि समिति ने कृषकों को 3405284.70 रूपए का भुगतान किया गया। समिति ने कृषकों को 705610 रूपए अधिक भुगतान कर दिया। भुगतान के सत्यापन में कई किसानों को भुगतान मिलने एवं अनेक किसानों को धान की राशि नहीं मिलने वहीं कई किसानों को बिना धान विक्रय किए राशि भुगतान की पुष्टि हुई। जांच में कुछ लोगों को धान विक्रय किए बिना ही किसान फर्जी तरीके से किसान पावती हासिल करने की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सीईओ ने रामानुजगंज थाने में मामले की रिपोर्ट 23 नवम्बर 2000 को दर्ज कर विवेचना उपरांत पुलिस ने कोर्ट में चालान प्रस्तुत किया। पुलिस ने मामले में समिति प्रबंधक सहित धान विक्रय किए बिना फर्जी किसान पर्ची एवं भुगतान प्राप्त करने वाले 17 लोगों को आरोपी बनाया। न्यायालय ने मामले की सुनवाई उपरांत आरोपियों को 3-3 साल के कारावास एवं 500-500 रूपए दंड की सजा सुनाई। न्यायालय के निर्णय से असंतुष्ट आरोपियों ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील की। मामले में अलग-अलग पांच अपीलें लगाई गई। समिति प्रबंधक सिलबानुस लकड़ा की मौत होने के कारण उसे मामले से पृथक कर दिया गया। अपील की सुनवाई उपरांत न्यायाधीश ने मामले में न्यायालय के पूर्व आदेश को यथावत रखते हुए 3 साल के कारावास एवं 500-500 रूपये दण्ड की सजा को यथावत रखा है तथा इंद्रावतीपुर निवासी शंभू गुप्ता आ.नत्थू गुप्ता, नंदु प्रसाद आ.नत्थू राम, रामानुजगंज निवासी बसंत गुप्ता आ.बलभद्र प्रसाद, रामचंद्र गुप्ता आ.अर्जुन प्रसाद, दिनेश कुमार गुप्ता आ.रामवृक्ष प्रसाद, विनोद कुमार गुप्ता आ.चतुरी साव, दीपक केशरी आ.विनोद केशरी, सुनिल गुप्ता आ.कपूर चंद्र साव, ओमप्रकाश गुप्ता आ.राजकुमार गुप्ता, संजय गुप्ता आ.राजकुमार गुप्ता, महेश कुमार अग्रवाल आ. स्व.नत्थूलाल को 3-3 साल कि कारावास एवं 500 रूपए दंड की सजा सुनाई है।




