मध्यप्रदेशराज्य

ए पी ओ शासन- प्रशासन को ठेंगा दिखाकर कर रहा पद का दुरुपयोग

निष्पक्ष जांच करा कर ए पी ओ पर हो सख्त कार्रवाई

 

बालाघाटl  ए पी ओ दिलीप कुड़ापे सारे नियम कानून को ताक पर रखकर, अपने पद का दुरुपयोग करने से बाज नही आ रहा है। कुछ पंचायत के रोजगार सहायक के साथ मिलकर शासन को खूब चूना लगा रहा है। ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत धुनधुनवार्धा में पदस्थ रोजगार सहायक के साथ मिलकर एक ही परिवार में चार जॉब कार्ड बनाया गया है। जब इसकी जानकारी एकत्रित की गई तो पता चला की यह जॉब कार्ड रोजगार सहायक के घर का ही है।

1. जॉब कार्ड नंबर 002/71 जो स्वयं श्यामलाल मर्सकोले रोजगार सहायक के नाम पर है।

2. जॉब कार्ड नंबर 002/71-A सीताबाई जो श्याम लाल की मां है।

3. जॉब कार्ड नंबर 002/71-B सरवंती बाई जो श्याम लाल की पहली पत्नी है।

4. जॉब कार्ड नंबर 002/71-C चैतीबाई यह भी श्यामलाल की ही दूसरी पत्नी है।

इस प्रकार स्वयं एवं मां तथा दोनों पत्नी के नाम से अलग-अलग जॉब कार्ड बनाकर एपीओ के साथ साथगांठ कर लाखों रुपए का चुना शासन को लगाया गया है। जानकारी अनुसार इसकी शिकायत सरपंच सचिव के द्वारा कुछ अधिकारियों से की गई , किंतु जनपद पंचायत बिरसा के ए पी ओ दिलीप कुड़ापे के द्वारा निजी स्वार्थ सिद्ध कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता रहा है। जबकि इस मामले में जानकारी अनुसार रोजगार सहायक की सेवा समाप्ति का पत्र जनपद बिरसा से प्रेषित कर दिया गया था, किंतु अति. कार्यक्रम अधिकारी द्वारा निजी स्वार्थ के चलते इस रोजगार सहायक को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
इस रोजगार सहायक पे दिलीप कुड़ापे ए पी ओ इतनी मेहरबान हैं कि 1 साल से अधिक अभी तक अपने पास उसे जनपद में अटैच कर रखा गया था, चर्चा का बाजार गर्म होते देख बाद में उसे धुनधुनवार्धा ग्राम पंचायत से लगभग 80 किमी. दूर ग्राम पंचायत बिजाटोला में अटैच कर दिया गया। इस रोजगार सहायक के द्वारा न तो धुनधुनवार्धा ग्राम पंचायत में कार्य किया जा रहा है और ना ही बिजाटोला ग्राम पंचायत में। फिर भी उसे वेतन बराबर दिया जा रहा है।
बात यहीं खत्म हो जाती तो और बात थी जनपद पंचायत बिरसा के अति. कार्यक्रम अधिकारी दिलीप कूड़ापे एवं जितेंद्र सेवईवार सहायक लेखा अधिकारी जनपद पंचायत बिरसा के द्वारा पद का दुरुपयोग करने के मामले आए दिन सुनने मिल जाते हैं। उच्च अधिकारियों को गुमराह कर इनके द्वारा रोजगार सहायकों को बिना नियम के एक पंचायत से दूसरे पंचायत में अटैच कर दिया जाता है, प्राय जो पंचायत रिक्त होती है उसे उसी पंचायत के पास के रोजगार सहायक को अटैच किया जाता है। किन्तु इनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया है, पंचायत जैरसी के रोजगार सहायक टामेश्वर बिसेन को जैरसी ग्राम पंचायत से भूतना ग्राम पंचायत अटैच किया गया है। वंही जैरसी ग्राम पंचायत को रिक्त बताकर ग्राम पंचायत सुरवाही के रोजगार सहायक को जैरसी ग्राम पंचायत में कार्य करने हेतु आदेश पारित कर दिया गया है। जबकि ग्राम पंचायत जैरसी के नाम पर ही टामेश्वर बिसेन को वेतन दिया जा रहा है।
ऐसे कई मामले हैं जैसे धुनधुनवार्धा के रोजगार सहायक को बिजाटोला अटैच किया गया , कैंडाटोला ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को हर्राभाट ग्राम पंचायत अटैच किया गया, ग्राम पंचायत गुदमा के रोजगार सहायक को जगला अटैच किया गया, ग्राम पंचायत ख़ुर्शीपार के रोजगार सहायक को ग्राम पंचायत बोरखेड़ा अटैच किया गया, सभी रोजगार सहायक की मूल पंचायत से अटैक की गई पंचायत की दूरी 20 से 80 किलोमीटर है। सोचने वाली बात यह है कि कम मानदेय में प्रतिदिन इतनी दूरी तय कोई कर्मचारी कैसे कर सकता है। यही कारण है कि ऐसे अधिकारी रोजगार सहायकों को भ्रष्टाचार के दलदल में अपने आप को झोकने में मजबूर कर रहे हैं। फिर उस रोजगार की गलती पकड़ कर यह अधिकारी भी अपनी जेब गर्म करते हैं। हम उच्च अधिकारियों से मांग करते हैं कि बिरसा जनपद पंचायत के अति. कार्यक्रम अधिकारी दिलीप कूड़ापे एवं जितेंद्र सेवईवार सहायक लेखा अधिकारी की भ्रष्ट कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच करा कर सख्त कार्रवाई की जाये एवं जनपद पंचायत बिरसा से हटाया जाए व समस्त रोजगार सहायकों को उनके मूल पंचायत या पंचायत के नजदीक वाली पंचायत में भेजा जाए।

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