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विधायक मधु भगत ने महाबोधी महाविहार, बोधगया का मुद्दा विधानसभा में उठाया

ब्यूरो बालाघाट(म0प्र0)

मध्यप्रदेश विधानसभा के वर्तमान सत्र में परसवाड़ा क्षेत्र के विधायक मधु भाऊ भगत ने शून्यकाल में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए सदन का ध्यान महाबोधी महाविहार, बोधगया (बिहार) के प्रबंधन से जुड़े बौद्ध समाज के संवेदनशील विषय की ओर आकर्षित किया। उन्होंने नियम 138(1) के अंतर्गत ध्यानाकर्षण सूचना प्रस्तुत करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को संबोधित किया और मांग की कि इस महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल का संचालन भारत में रहने वाले बौद्ध अनुयायियों को सौंपा जाए।

विधायक भगत ने कहा कि महाबोधी महाविहार बौद्धगया, न केवल बिहार या भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व में बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केन्द्र है। उन्होंने बताया कि विगत एक वर्ष से देशभर में बौद्ध समाज इस विषय को लेकर आंदोलनरत है, जिसमें उनके अपने ही धर्मस्थल के अधिकार और संचालन की मांग की जा रही है। बालाघाट जिले से लेकर देश के कई राज्यों में बौद्ध समाज द्वारा यह मांग लगातार उठाई जा रही है कि जिस प्रकार मंदिर में पुजारी, मस्जिद में मौलवी, चर्च में पादरी और गुरुद्वारे में ग्रंथी होते हैं, ठीक उसी प्रकार महाबोधी महाविहार का संचालन बौद्ध भिक्षुओं द्वारा किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में महाविहार के प्रबंधन में अन्य धर्मों के लोगों की भागीदारी और 1949 में लागू बी.टी. एक्ट के तहत बनी व्यवस्थाएं बौद्धों की धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। विधायक भगत ने आग्रह किया कि मध्यप्रदेश सरकार इस विषय में केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजे, जिसमें 1949 के बी.टी. एक्ट को रद्द करने और भारत में रहने वाले बौद्धों को महाबोधी महाविहार का पूर्ण स्वामित्व सौंपने की मांग की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की भावनाओं, धार्मिक अधिकारों और आस्था का मामला है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जहां सभी धर्मों को समान अधिकार प्राप्त हैं, ऐसे में बौद्धों को भी अपने प्रमुख धार्मिक स्थल पर अधिकार मिलना चाहिए।

विधायक भगत ने सदन से आग्रह किया कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर केंद्र सरकार के समक्ष ठोस प्रस्ताव भेजा जाए ताकि देश के बौद्ध अनुयायियों को उनके धर्मस्थल का स्वामित्व और संचालन का अधिकार मिल सके। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश सरकार बौद्ध समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करेगी।

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