छत्तीसगढ़राज्य

जैव-औषधियों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर बल

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU-FORTE) के तत्वावधान में जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी Biopharmaceuticals Bridging the Gap Between Pharmacy and Biotechnology का शुभारंभ हुआ। उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. आर.एन. पटेल, निदेशक, ष्टस्ङ्कञ्ज-स्नह्रक्रञ्जश्व रहे। अपने उदघाटन संबोधन में डॉ. पटेल ने ट्रांसलेशनल रिसर्च (प्रयोगशाला से व्यावसायिक उपयोग तक की शोध प्रक्रिया) को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों में औषधीय अनुसंधान की असीम संभावनाएं हैं जिन्हें आधुनिक फार्मास्युटिकल तकनीकों के साथ जोडऩे की जरूरत है। संगोष्ठी के पहले दिन आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में विभिन्न विशेषज्ञों ने विचार प्रस्तुत किए। प्रथम सत्र में डॉ. चंचल दीप कौर, प्राचार्या, कृष्णा विकास इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च, रायपुर ने बौद्धिक संपदा अधिकार और अंतर्विषयक नवाचार (Interdisciplinary Innovation) की उपयोगिता पर व्याख्यान दिया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. अजाजुद्दीन, प्राचार्य, रुंगटा कॉलेज ऑफ फार्मेसी, भिलाई ने की। तृतीय सत्र में डॉ. अवधेश श्रीवास्तव, सहायक प्राध्यापक, शासकीय दानवीर तुलाराम पीजी कॉलेज, उतई ने भारतीय ज्ञान प्रणाली से आधुनिक फार्मेसी तक विषय पर बोलते हुए पारंपरिक जैव तकनीकों और वर्तमान चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर चर्चा की। अध्यक्षता डॉ. अमित रॉय, प्राचार्य, छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, दुर्ग ने की। चतुर्थ सत्र में डॉ. शिव शंकर शुक्ला, प्रोफेसर, कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, रायपुर ने From Lab to LifeÑ The Transformative Impact of Biopharmaceuticals on Healthcare विषय पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया। उन्होंने रिकॉम्बिनेंट थेरेपी और बायोसिमिलर्स की भूमिका को विस्तार से समझाया। सत्र की अध्यक्षता डॉ. सत्यब्रत भांजा, प्राचार्य, RITEE, रायपुर ने की। कार्यक्रम का संचालन दीपिका साहू और विनिता गोटी द्वारा किया गया। संयोजिका की भूमिका अंचल वर्मा ने निभाई, जबकि संयोजक प्रो. एस. प्रकाश राव रहे। पहले दिन की संगोष्ठी ने वैज्ञानिक नवाचार, भारतीय पारंपरिक ज्ञान, और आधुनिक औषधि अनुसंधान के बीच सेतु निर्माण की दिशा में सार्थक पहल की। प्रतिभागियों में अगले दिन की गतिविधियों को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।

Related Articles

Back to top button