
सुकमा। सुकमा जिले में 2012 में सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को किडनैप करने वाले नक्सली समेत 1.18 करोड़ रुपये के 23 नक्सलियों ने शनिवार को सुरक्षा बल के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में नौ महिला नक्सली भी शामिल है। इनमें से आठ नक्सली माओवादियों की सबसे खतरनाक पीएलजीए बटालियन नंबर.1 के सदस्य थे। नक्सली लोकेश उर्फ पोडिय़ाम भीमा भी है जिसने साल 2012 में सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन का अपहरण कर लिया था। वहीं इनमें तीन दंपती भी हैं जो हिंसा का रास्ता छोड़कर, मुख्य धारा में लौट आए हैं। ये सभी नक्सली अलग-अलग मुठभेड़ों में सैकड़ों जवानों की हत्या में शामिल थे। बस्तर में पहली बार एक साथ 1.18 करोड़ के इनामी नक्सलियों का सरेंडर हुआ है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में एक डीवीसीएम, छह पीपीसीएम, चार एसीएम और 12 पार्टी सदस्य हैं। 11 नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपए इनाम घोषित है जबकि चार नक्सली 5-5 लाख, एक पर तीन लाख और सात नक्सली 1-1 लाख रुपए के इनामी हैं। आठ लाख का इनामी हार्डकोर नक्सली डीवीसीएम लोकेश उर्फ पोडिय़ाम भीमा ने सरेंडर किया है। ये दक्षिण सब जोनल ब्यूरो टीम का कमांडर भी था। वह वर्ष 2012 में कलेक्टर के अपहरण समेत साल 2017 में बुर्कापाल और 2021 में टेकलगुड़ा मुठभेड़ में शामिल था। इन दोनों घटनाओं में 46 जवान शहीद हुए थे। इसने अलग-अलग घटनाओं में शामिल रहकर अन्य जवानों की भी हत्या की है। गौरतलब है कि पिछले 24 घंटों के भीतर प्रदेश में कुल 45 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ लोकतंत्र पर भरोसा दिखाया है।
छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में बदलाव की बयार बह रही है। बस्तर बदल रहा है, बंदूकें थम रही हैं और लोकतंत्र की लौ अब हर कोने में जल रही है। इसी परिवर्तनशील वातावरण में सुकमा जिले में 1.18 करोड़ के इनामी 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन्हें मिलाकर पिछले 24 घंटों में कुल 45 नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास जताया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अभूतपूर्व घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स के माध्यम से व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि विश्वास की उस जीत का प्रतीक है, जो हमारी सरकार ने नियद नेल्ला नार जैसी जनउन्मुख योजनाओं के माध्यम से गाँव-गाँव तक पहुँचाया है। अब यहां बंदूक की गोली नहीं, विकास की बोली सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले 15 महीनों में 1521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की पहुंच और विश्वास निरंतर बढ़ा है। यह सफलता राज्य सरकार की ‘नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ की सकारात्मकता को भी दर्शाती है, जिसके तहत हथियार छोडऩे वाले नक्सलियों को न केवल सामाजिक सम्मान, बल्कि पुनर्वास और आजीविका का अवसर भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे सुशासन के विजन का सजीव उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारा प्रदेश तय समय-सीमा के भीतर नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होगा और बस्तर क्षेत्र का प्रत्येक नागरिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा।




