धपेरा रेतघाट पर राजस्व व पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने की छापेमारी
11 ट्रेक्टर जप्त किये, छापामार कार्यवाही से मचा हड़कंप

बालाघाट। लालबर्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले वैनगंगा नदी के धपेरा अस्वीकृत रेतघाट में सुबह वारासिवनी एसडीएम आर. आर. पांडेय, एसडीओपी वारासिवनी और पुलिस अमले ने संयुक्त रूप से छापेमार कार्यवाही कर यहां से रेत के उत्खनन करने में जुटे 11 ट्रैक्टरों को जप्त कर लालबर्रा थाना भेजने की कार्यवाही की हैं। राजस्व विभाग की इस कार्यवाही से हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गई । इस संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक धपेरा रेत घाट स्वीकृत नहीं हैं। लेकिन यहां से बहुतायत में रेत की निकासी हो रही थी। यह रेत निकासी घाट के दोनों ओर अर्थात धपेरा के ओर से धपेरा, मोहगांव सहित अन्य गांव के ट्रेक्टर मालिकों द्वारा और कुम्हारी की ओर से भटेरा, खैरी, कुम्हारी, पाथरवाड़ा सहित अन्य गांव के रेत कारोबार से जुड़े ट्रेक्टर संचालकों द्वारा रेत की निकासी की जा रही थी । रेत घाट स्वीकृत नहीं होने के बावजूद अवैध रूप से निकाली जा रही यह रेत एक तरह से संरक्षण में ही निकाली जा रही हैं। लेकिन किसी तरह से कार्यवाही नहीं हो रही थी। कार्यवाही नहीं होने की वजह यह कि रेत निकासी करने वाले कारोबारी अपने ट्रेक्टर से रेत लेकर शहर पहुंचते या फिर भरवेली क्षेत्र की ओर जाते हैं। जिसके लिये रेत ठेकेदारों के लड़के रायल्टी काटते हैं। रायल्टी देकर ही वे इस रेत का परिवहन करते हैं। एक तरह से रेत के निकासी करने वाले भले घाट स्वीकृत नहीं हैं पर रेत की रायल्टी ठेकेदार को चुका रहे हैं। धपेरा ठेकेदार को चुका रहे हैं। धपेरा बैनगंगा नदी से रेत के अवैध उत्खनन को लेकर 12 जून को सुबह के समय वारासिवनी एसडीएम व एसडीओपी तथा पुलिस ने संयुक्त रूप से दबिश दी और यहां पर रेत भरकर परिवहन करने के लिये ट्रेक्टर पहुंचे थे। जिन्हें जप्त किया गया और थाने पहुंचा दिया गया। जानकारी में आया कि जप्त किये गये ट्रैक्टरों में आधा दर्जन ट्रेक्टर भटेरा और शेष ट्रेक्टर धपेरा व मोहगांव के हैं। जिसे लेकर वैधानिक कार्यवाही की जा रही हैं।

एक दिन पहले पुलिस ने की थी रैकी
सूत्रों के मुताबिक रेतघाट पर दबिश देने के पूर्व यहां पर पुलिस के कुछ कर्मचारी पहुंचें थे। जिन्होने रेकी की थी। 11 जून को पहुंचे कुछ जवानो ने रेत घाट में किस समय पर ट्रैक्टर आते हैं और परिवहन कर चले जाते हैं को लेकरविस्तृत जानकारी हासिल की और उसके पश्चात अपने अधिकारियों को सूचित किया। जिसके पश्चात योजना के मुताबिक धपेरा रेतघाट में दबिश दी गई। हालांकि यह कार्यवाही काफी देर से हुई हैं। यहां पर अवैध उत्खनन लंबे अर्से से हो रहा हैं। लेकिन अहम बात यही सामने आयी कि रेत निकासी करने वालों को ठेकेदार व विभागीय स्तर पर संरक्षण मिला हुआ था। जिनसे रेत निकासी करने पर रायल्टी वसूल की जाती थी और रेत का परिवहन करने वाले रायल्टी देकर ही परिवहन का कार्य कर रहे थे। जानकारी में आया कि रेत घाट में जरूर निकासी के दौरान रायल्टी नहीं होती थी। यही वजह हैं कि यहां पर राजस्व व पुलिस विभाग ने दबिश दी और रेत निकासी करते हुये 11 ट्रेक्टरों को जप्त कर लिया गया।
रायल्टी वसूली के फेर में पिस रहे रेत निकासी करने वाले ट्रेक्टर संचालक
धपेरा रेत घाट स्वीकृत नहीं होने के बावजूद यहां से रेत के अवैध निकासी और उसकी रायल्टी वसूली होने के मामला काफी गंभीर हैं। अहम सवाल यही कि ठेकेदार के लोग रायल्टी कैसे वसूल रहे हैं ? क्या ऐसे मामले की जांच की जायेगी ? जैसे कि निकट में भटेरा रेतघाट स्वीकृत हैं और इस घाट में रेत नहीं हैं। फिर भी भटेरा रेत घाट के नाम पर करोड़ों की राशि रायल्टी के माध्यम से वसूल कर ली गई हैं। रायल्टी या टोकन पर्ची के माध्यम से यहां से वसूली होती हैं। अगर रायल्टी वसूल नहीं होती और रेत की निकासी करते हुये वाहनों को पकड़ने की कार्यवाही की जाये तो निश्चित ही प्रशासन की कार्यवाही पर सवाल नहीं उठेगें। अन्यथा प्रशासन की कार्यवाही पर सवाल उठना लाजमी हैं जैसे कि धपेरा घाट पर हुई कार्यवाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। धपेरा रेत घाट में हुई कार्यवाही के संबंध में यहां यह चर्चा जोरों से हो रही कि रेत ठेकेदार के अलग-अलग ग्रुप हैं। जिनके बीच रायल्टी की राशि कम व अधिक आने को लेकर समस्या बनी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक धपेरा से रेत निकासी करने वाले ट्रैक्टर सीधे शहर की ओर आते हैं या भरवेली की ओर जाते हैं। इस दौरान शहर के ओर आने वाले ट्रेक्टरों की रायल्टी काटने का कार्य इस क्षेत्र में कार्यरत रेत ठेकेदार के कर्मचारी करते हैं। एक तरह से ट्रेक्टर मालिक रेत की रायल्टी चुकाने का कार्य कर रहे हैं। शहर की ओर वाहन आने से रायल्टी की अधिक वसूली हो रही और एक ग्रुप को अधिक आवक हो रही हैं। वही धपेरा व मोहगांव की ओर से रेत निकासी करने वाले ट्रेक्टर संचालक कुछ रायल्टी चुका रहे तो कुछ नहीं या फिर उस और कम संख्या में परिवहन हो रहा हैं। जिससे उस क्षेत्र में जो ग्रुप रायल्टी वसूलने का कार्य कर रहे हैं उन्हें नुकसान हो रहा या फिर उनकी आवक कम हो रही हैं। इसी के चलते इन ग्रुप में आपस की टकराहट के चलते शिकायत कर प्रशासन पर दबाव बनाते हुये कार्यवाही करवायी गई हैं। अन्यथा कई वर्षों से रेत की निकासी होने के बावजूद राजस्व विभाग के पटवारी, आरआई सहित तमाम अमला क्या कर रहे थे जो इस अस्वीकृत रेत घाट से निकासी होने दे रहे और कोई दविश भी नहीं दे रहे थे। बहरहाल रेत निकासी करने के लिये पहुंचें ट्रेक्टरों को जप्त करने के चलते एक तरह से ट्रेक्टर मालिक रायल्टी भी चुका रहे और वे कार्यवाही के नाम पर पिस भी रहे हैं।




