मध्यप्रदेशराज्य

जातिगत जनगणना को केंद्र से मिली हरी झंडी

ओबीसी महासभा के संघर्ष को मिली बड़ी जीत : सौरभ लोधी

 

बालाघाट,

देश में लंबे समय से ओबीसी महासभा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जातिगत जनगणना की मांग की जा रही थी, लेकिन आजादी के बाद से ही देश में जातिगत जनगणना नहीं कराई गई थी।ब्रिटिश हुकूमत ने 1871 से 1931 तक जातिगत जनगणना कराई, लेकिन आजादी के बाद जातिगत जनगणना नहीं कराई गई।जिसके चलते जनसंख्या के आधार पर ओबीसी को उनका हक और अधिकार नहीं मिल पा रहा था। जनसंख्या के आधार पर ओबीसी को आरक्षण और सभी वर्ग क्षेत्रो हिस्सेदारी ना मिलने पर विगत 10 वर्षों से ओबीसी महासभा सहित अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा जातिगत जनगणना कराए जाने की मांग की जा रही थी। जहां *जिसकी जितनी संख्या भारी- उतनी उसकी हिस्सेदारी* के नारे के साथ ओबीसी महासभा ने जगह-जगह आंदोलन, धरना प्रदर्शन किए थे। बालाघाट सहित पूरे प्रदेश में जातिगत जनगणना ,ओबीसी आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने कर आंदोलन करने पर महासभा के लोगों को गिरफ्तार कर, उनपर अपराध भी दर्ज किया गया था।लगातार इन आंदोलन ,रैली, धरना, प्रदर्शन ,आवेदन ,निवेदन ,ज्ञापन और आगामी समय में होने वाले उग्र आंदोलन को भाँपते हुए आखिरकार मोदी सरकार को ओबीसी महासभा के सामने झुकना ही पड़ा।इसलिए मोदी सरकार ने बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में जातिगत जनगणना कराने का फैसला किया है जो स्वागत योग्य है।वही ओबीसी महासभा की बड़ी जीत है।

 अब ओबीसी वर्ग को उसका हक और अधिकार मिलकर रहेगा : सौरभ लोधी

ओबीसी महासभा प्रदेश अध्यक्ष सौरभ लौधी ने बताया कि हमने हमेशा संविधान के दायरे में रहकर अपने हक की लड़ाई लड़ी है।यह जातिगत जनगणना, केवल आंकड़े नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के हक,अधिकार और पहचान का सवाल है।ओबीसी समुदाय के इस हक -अधिकार के लिए हमने बालाघाट से लेकर, जबलपुर, भोपाल तक कई आंदोलन धरना प्रदर्शन किए, 2 दिसंबर 2022 को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश आगर के मालवा में ओबीसी महासभा के पदाधिकारी ने राहुल गांधी से मुलाकात कर पूरे देश में जातिगत जनगणना की मांग की थी। जिन्हें बताया गया था कि जातिगत जनगणना ना होने से ओबीसी वर्ग का काफी नुकसान हो रहा है और उन्हें उनके हक अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। जिसके बाद से ही राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को पूरे देश में जोर-जोर से उठाया था। वहीं हर कोई जातिगत जनगणना को लेकर मोदी सरकार को घेरने का काम कर रहा था। जिससे मोदी सरकार बैक फुट पर आई और बुधवार को कैबिनेट बैठक में मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना कराए जाने का फैसला लिया है।जो ओबीसी महासभा की बड़ी जीत है।ओबीसी महासभा की मांग है की जनगणना के आंकड़े पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किए जाए।ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी दी जाए और केंद्र व राज्य स्तर पर नीति निर्धारण में ओबीसी वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।ताकि जनसंख्या के आधार पर ओबीसी वर्ग को हर क्षेत्र में आरक्षण मिल सके।

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